Monday, 22 April 2013

शहद के औषधीय गुण

1) एक छोटा चम्मच शहद मे एक बादाम घिस कर मिला लें और रोज  छोटे बच्चों को चटा देने से वे मजबूत कांतिवान मोटे हो जाते है । 

2) बच्चों को खांसी होने पर एक चम्मच शहद मे एक चुटकी हल्दी मिलाकर सोते समय व सुबह खाली पेट चटा दे दो तीन दिनों मे खांसी गायब हो जाएगी । इस नुस्खे  को बडे भी आजमा सकते हैं।

3) शहद मे अदरक का रस और एक चुटकी दालचीनी पावडर मिलाकर चाटने से जोड़ों मे आराम मिलता है । खांसी होने पर भी इस प्रयोग को आजमाए सौ प्रतिशत आराम मिल जाएगा । 

4) भोजन से अरुचि होने पर एक चम्मच खट्टे अनार का रस और एक बड़ा चम्मच शहद और सेंधा नमक  मिलाकर खिलाने से भोजन मे रुचि पैदा हो जाती है । 

5) एक चुटकी छोटी हरड़ का पावडर और एक चम्मच शहद मिलाकर खाने से अम्ल पित्त शांत हो जाता है ।
6) आधा नींबू का रस एक चम्मच शहद मिलाकर  चाट  लें अम्ल पित्त मे आराम हो जाएगा ।

7) नींबू के पत्तों का रस और शहद समान मात्रा मे लेकर खिलाने से पेट के कीड़े मर जाते है ।

8) त्रिफला एक छोटी चम्मच और  एक चम्मच शहद मिलाकर रात्री के समय खाने के बाद  चाट लिया करें और ऊपर से दूध पी लें , पेट के सभी रोगों से छुटकारा मिल जाएगा ।

9) बीस ग्राम शहद दस ग्राम गाय का मक्खन मिलाकर दिन मे दो बार खाने से टी बी रोग ठीक हो जाता है ।

10) अकरकरा का चूर्ण एक ग्राम दस ग्राम शहद मिलाकर चाटने से हिचकी दूर हो जाती है ।

11) शहद और दो बूंद नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे की कांति लौट  आती है। 

12) एक चम्मच प्याज का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर बालों पर लगाने से बाल झड़ना बंद हो जाते हैं ।  

Friday, 5 April 2013

बालों के लिए कुछ खास नुस्खे

खूबसूतरत बाल व्यक्ति की खूबसूरती मे इजाफा तो करते ही है साथ ही मानसिक संतुष्टि भी देते है। वरन जिनके बाल झड रहे होते है या कम होते है उनकी मनःस्थिति का अंदाजा लगाना कठिन होता है । पिछले लेख मे मैंने बालों की साफ सफाई के विषय मे बताया था आज प्रस्तुत है झड़ने से रोकने के उपाय :-

1) एक प्याज का रस एक छोटा चम्मच शहद दोनों मिला कर बालों की जड़ों मे हल्के हाथ से मसलें, करीब आधे घंटे तक मालिश करें, सूखने पर हर्बल शैम्पू से धो दें, ।

2) जवा कुसुम और गुलाब की  पत्तियाँ समान मात्रा मे लेकर पेस्ट बना लें इस पेस्ट को बालों पर लगा कर एक घंटा सूखने के लिए छोड़ दें फिर हर्बल शैंपू से बालों को धो दें। एक महिना लगातार करने से बाल झड़ना बंद हो जाता है । 
3)  बेल की पत्तियाँ पीस कर लगाने से  बाल झड़ना बंद हो जाता है। बाजारी शैम्पू की बजाय हर्बल शैंपू लगाएँ । शैंपू बनाने की विधि पिछले लेख मे मैंने लिखी है । 
4) एक या दो अंडा ( अपने बालों  की लंबाई के हिसाब से ) लेकर उसका पीला भाग निकाल लें फेंट कर उन जगहों पर लगाएँ जहां के बाल ज्यादा कम हैं सूखने के बाद बाकी बचा हुआ सफ़ेद हिस्सा एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर बालों पर लगा लें एक घंटे के बाद धो दें । बालों मे चमक भी आ जाएगी और बाल झड़ना बंद हो जायेगा। 
5) बथुआ के पत्ते और पालक के पत्ते उबालने के बाद जो  पानी बच रहता है उसका प्रयोग बालों को धोने के लिए करें बाल झड़ेंगे भी नहीं और असमय सफ़ेद भी नहीं होंगे । 

6) गाजर का जूस निकालने के बाद जो  भूसी बच जाती है उसका प्रयोग आप बालों के लिए करें । इसको थोड़ा पानी डालकर पेस्ट बना लें इसमे आंवला रस मिला लें और बालो पर लगा दें सूखने पर ही धोयेँ।      

खान पान मे सुधार करें हरी सब्जियाँ , दाल , फल इत्यादि भोजन में शामिल करें , जंक फूड तेलीय फूड को बाय कहें सुंदर त्वचा और सुंदर बालों के स्वामी बनें ।

Wednesday, 3 April 2013

गर्मियों मे बालों की उचित देखभाल

गर्मियों मे यदि बालों की उचित देखभाल न हो तो बाल बेजान, रूखे और दो मुंहे हो जाते है । कुछ नुस्खे बालों को बीमार होने से बचाने के लिए प्रस्तुत है आशा है आप लाभान्वित अवश्य होंगे । 1)  गर्मी के मौसम मे पसीना बहुत आता है तथा धूल भी बहुत उड़ती है जिससे बाल गंदे हो जाते है इसके लिए बालों की साफ सफाई बेहद जरूरी है । 
2) यदि बाल बहुत बड़े है तो सप्ताह मे कम से कम तीन चार बार बालों को  शैंपू करें । इसके लिए आप घर मे भी शैंपू तैयार कर सकते हैं :- बाजार से रीठा ,आंवला , शिकाकाई समान मात्रा मे ले लें इसे कूट पीस कर कपड़ छान कर लें इसे एक डिब्बे मे भर कर रख लें , बाल धोने से आधा घंटा पहले पानी मे भिगो कर रख दे इसे बालो मे लगा कर छोड़  दें आधे घंटे बाद मसल कर सादे पानी से बाल धो दें। बाल चमकीले मुलायम और काले बने रहेंगे ।
   
3)  सप्ताह मे दो बार कन्डीशनिंग करें। इसके लिए मेंहदी पावडर ,आंवला पावडर , शिकाकाई पावडर , सभी एक एक टेबल स्पून लेकर चाय के पानी मे भिगो  दें और लगते समय  दही एक बड़ा चम्मच , एक टी स्पून शहद , एक अंडा फेंट कर मिला लें बालों की जड़ों तक अच्छे से लगा कर दो घंटे के लिए छोड़ दें। इसके बाद नींबू या इमली के पानी से बाल धो दें । शैंपू न करें । शैंपू करने से पहले बालो मे तेल की मालिश करें । 

4)  खट्टा दही और एक बड़ा चम्मच शहद मिलाकर फेंट लें इसमे एक चम्मच नारियल का तेल मिला लें इस कंडीशनर को बालों मे जड़ों तक अच्छी तरह लगा लें  सूख जाने तक लगा रहने दें फिर ठंडे पानी से धो  दें  ध्यान  रखेँ की बालों को गरम या गुनगुने पानी से न धोएँ अन्यथा बाल झड़ने लगते है । 

5) आधा कटोरी इमली का रस एक बड़ा चम्मच नारियल का तेल मिलाकर बालों पर लगाए बाल झड़ना  बंद हो जायेंगे । 
6) चाय का पानी बना लें इससे बाल धोये बालों का सबसे  बढ़िया टॉनिक है । 
7) बालों की रूसी को दूर करने के लिए एक चम्मच  अरहर की पानी मे एक घंटे भिगो दें और पीस लें इसमें एक चम्मच जैतून का तेल मिलाकर बालों पर लगा कर दो से तीन घंटे के लिए छोड दें फिर शैंपू कर ले लेकिन शैंपू हर्बल ही हो तो ज्यादा अच्छा है वरना रूसी बढ्ने का खतरा रहता है ।  

8) नींबू का रस और सरसों का  तेल समान मात्रा मे लें अच्छी तरह फेंट लें ये पेस्ट बालों पर लगा दें एक घंटे बाद धो दें । दस बारह दिन तक करने से रूसी खत्म हो जाती है । 

नोट :- इन प्रयोगों को आजमाते वक्त बाजार के शैंपू का प्रयोग बिलकुल न करें ।        

Sunday, 31 March 2013

गर्मियों के लिए उचित आहार विहार की चर्या

आजकल हम आप देख ही रहे है कि भोजन शैली बड़ी ही विचित्र हो चुकी है। कुछ भी खा कर पेट भरने से मतलब वाली शैली ने पेट के रोगों को बढ़ावा दिया है। इस विषय पर हम विस्तार से चर्चा करेंगे।
हमारे पाचन तंत्र को मौसम के अनुरूप आहार विहार की आवश्यकता होती है तभी हमारा पाचन तंत्र हमारे शरीर को स्वस्थ व निरोगी रखने मे सहायक हो पाता है। इसी संबंध मे " अष्टांग हृदय सूत्र " मे कहा भी गया है -

" शीते वर्षासु चाद्दांख्रीन् वसंतेअन्त्यान् रसान् भजेत् ।
  स्वादुं निदाघे, शरदि स्वादुतिक्त कषाय कान् ॥
  शरद् वसंत्यो रूक्षं शीतं धर्मघनांत्योः।
   अन्नपानं समासेन विपरीतमतोन्यदा ॥"

अर्थात :- शीत ऋतु (हेमंत और शिशिर) एवं वर्षा ऋतु मे मधुर, अम्ल, और लवण वाले पदार्थों का सेवन करना चाहिए। वसंत ऋतु मे तिक्त (चरपरे), कटु (कडवे), और कषाय(कसैले) रस वाले पदार्थों का सेवन करना चाहिए। ग्रीष्म ऋतु मे मधुर, तिक्त और कषाय रस वाले पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

 संक्षेप मे स्वास्थ्य की रक्षा के लिए ऐसा ऋतु अनुकूल आहार विहार करना चाहिए।

 यहाँ गर्मियों के आहार विहार की चर्चा करेंगे, क्योकि इस मौसम मे हमारे शरीर का पानी पसीने के रूप मे निकल जाता है अतः जलीय पदार्थों का सेवन अधिक मात्रा मे करना चाहिए, ताकि शरीर मे शीतलता और तरावट बनी रहे । इसके लिए -
1) सुबह खाली पेट दो से तीन गिलास पानी पियें, यदि खाली पेट पानी न पीते हो या न पी पाते हों तो एक कप पानी से शुरू करें धीरे धीरे बढ़ाते जाएँ । इससे पेट साफ रहेगा और वायु तथा अम्ल  रोगों की संभावना कम होगी ।

2) दिन मे बिना प्यास के भी दस से बारह बार पानी पीना चाहिए, घर से बाहर निकलते वक्त भी पानी पीकर ही निकलना चाहिए। इससे शरीर मे पानी की कमी नहीं होती और लू भी नहीं लगती । 

3) तरबूज , खरबूज , ककड़ी , खीरे , टमाटर , प्याज , लौकी, तोरई , परवल का सेवन अवश्य करना चाहिए । 

4) तली भुनी चीजें , मिर्च मसालेदार और भारी गरिष्ठ भोजन का त्याग ही उचित रहता है। 

5) गर्मियों मे शाम का भोजन ताजा, हल्का, सुपाच्य और थोड़ी कम मात्रा मे ही करना चाहिए क्योंकि इस ऋतु मे रातें छोटी होती है और पाचन क्रिया को उतना समय नहीं मिलता जितना शीत ऋतु मे मिलता था ।

6) रात को देर रात भोजन नहीं करना चाहिए भोजन का समय बदल लें नौ बजे तक भोजन कर लें फिर चाहे सौ कदम ही टहलें पर टहलें ।

7) देर रात जागना पड़े पड़े तो कुछ खाते रहने की बजाय पानी पीते रहें ताकि पेट मे उष्णता न होने पाये । कुछ खाना ही चाहें तो फ्रूट ज्यूस पी लें या मुरमुरा (लइया)  प्याज ,टमाटर हरी धनिया के साथ भेल बना ले इसे खाएं ।

Sunday, 24 March 2013

होली के रंग कैसे कैसे

मित्रों होली आ गई है ! होली के इस हुडदंग से कोई शायद ही बच पाये । जिस प्रेम और अपने पन से होली का त्योहार मनाया जाता रहा है वह तो अब रहा ही  नही लेकिन होली के नाम पर हुड़दंग ही रह गया है। रासायनिक रंगो का प्रयोग  त्वचा व आँखों के लिए बेहद नुकसान दायक है । जिससे कई समस्याएँ उत्पन्न हो जाती  है जैसे त्वचा का झुलस जाना , छाले पड़ना , आँख  मे जलन , रोशनी का धूमिल हो जाना इत्यादि समस्याएं इन रासायनिक रंगों की वजह से ही हो जाती हैं । 

सर्व प्रथम तो हमे इन रंगों को ही न कहना होगा । और स्वयं ही घर पर हर्बल रंग बना लेने चाहिए ताकि हमारी त्वचा और आँखें बची रहें और इन रासायनिक रंगों को बढ़ावा न मिले ।

हर्बल रंग बनाने के लिए हम घर पर ही चुकंदर से गुलाबी रंग , टेसू ( पलाश ) के फूल से पीला रंग , हल्दी से पीला रंग , पालक से हरा रंग बना सकते है , बाजार मे हर्बल सूखे रंग अबीर गुलाल मौजूद है उनही से खेलें । और बच्चों को भी इन रंगों से ही खेलने को प्रोत्साहित करें ।

होली खेलने से पूर्व शरीर पर सरसों के तेल की मालिश करने से रंगों का कुप्रभाव ज्यादा नहीं होता । इसलिए सरसों का तेल बालों से लेकर पाँव तक अच्छे से लगा लें ।

रंगों के कारण यदि त्वचा पर कोई कुप्रभाव हुआ है तो तुरंत चन्दन का लेप लगा दें और रंग न खेलें ।
मुलतानी मिट्टी का लेप भी त्वचा को ठंडक प्रदान करता है इसमे एक छोटा टुकड़ा कपूर, आधा टी स्पून हल्दी और गुलाबजल मिलाकर लगाने से त्वचा को आराम मिलता है ।

एक टेबल स्पून मलाई , एक चुटकी बोरिक पावडर , एक छोटा टुकड़ा कपूर मिलाकर त्वचा पर लगाएँ आराम मिलेगा । इस पेस्ट को रंग खेलने से पूर्व भी लगा सकते है इससे त्वचा पर रंगो का असर ज्यादा नहीं होगा ।

दस बारह मूँगफली के दाने दूध मे भिगो कर फ्रिज मे रख दें और दो तीन घंटे बाद एकदम महीन पेस्ट बना लें अगर पेस्ट पतला हो जाए तो इसमे बेसन मिला लें , इस पेस्ट को उबटन की तरह लगाएँ सूखने के लिए छोड़ दें । सूख जाने पर रगड़ कर साफ कर दें त्वचा की जलन तो शांत हो ही जाएगी साथ मे रंग भी निखर आयेगा ।

गुलाब की पंखुड़ियाँ पीस कर लगाने से भी लाभ मिलता है ।


होली की बहुत बहुत शुभकामनायें ।

Monday, 18 March 2013

दांत शरीर का अनमोल अंग

स्वस्थ और मजबूत दांत सिर्फ चेहरे की सुंदरता ही नहीं बढ़ाते अपितु पाचन क्रिया को भी दुरुस्त रखते हैं । पहले जमाने मे लोग दाँतो व मसूड़ों की सुरक्षा व मजबूती के प्रति  काफी सतर्क रहते थे परंतु ऐसा नहीं है कि आज नहीं है , लेकिन आज केवल नए नये दँत मंजनों के विज्ञापन ही लुभा पाते हैं। आज का खान पान दांतों पर बहुत बुरा असर डालता है। 

पहले दांतों की मजबूती के लिए बुजुर्गों  द्वारा नीम बबूल इत्यादि की दातौन की जाती थी । दाँतो की मजबूती के लिए घरों मे बनाया गया दँत मंजन प्रयोग किया करते थे । परंतु आजकल थोड़ी लापरवाही बरती जा रही है इसलिए दांतों के रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है ।

गरम या ठंडा पेय पीने से दांतों मेँ तेज टीस होती है , मेडिकल भाषा मे इसे एक्सपोजर कहते है । इसे जल्दी दूर न किया गया तो यह बढ़ती ही जाती है । इसके लिए घरेलू नुस्खा है :- सरसों के दाने के बराबर भुनी हुई हिंग साफ रुई मे दबा कर दांत मे दबा लें थोड़ी ही देर मे आराम हो जाएगा । इस नुस्खे को पीड़ा समाप्त होने तक प्रयोग करना चाहिए,  उसके बाद बंद कर देना चाहिये।

दांतों मे पायरिया होने पर मुंह से बुरी गंध आती है जो खुद को भी बुरी लगती है , मसूड़ों से खून आना , पीब आना , दांत हिलना ये  सारे लक्षण पायरिया के हैं । ऐसी स्थिति मे :-

1) देसी तंबाकू तवे पर तब तक भूने जब तक वह जल कर काला न पड़ जाए ठंडा कर पीस लें , इसमे काला नमक , 25 ग्राम फिटकरी पीस कर मिला ले और दो तीन बार छान कर शीशी मे भर कर रख लें , इस चूर्ण पर नींबू की दो चार बुँदे टपका कर हल्के हाथ से मसूढ़ों पर मलते हुए मंजन करें । यह प्रयोग नित्य सुबह शाम समस्या का अंत होने तक करते रहें ।

2) अनार के छिलके पानी मे डाल कर खूब खौला कर ठंडा कर लें । इस पानी से दिन मे तीन चार बार कुल्ले करें । इससे मुंह की बदबू से बहुत जल्द छुटकारा मिल जाएगा ।

3) अमरूद की पत्तों का काढ़ा बना कर कुल्ले करें मुंह की दुर्गंध से निजात मिल जाएगी ।

4) पेट मे कब्ज न होने दें अन्यथा दांतों के रोगों को बढ़ावा मिलता है ।इसके लिए एक छोटी चम्मच जीरा चबा कर खाने से भी दांतों की समस्या से निजात मिल जाती है । 

5) सफ़ेद नमक एक चुटकी , हल्दी एक चुटकी , एक छोटी चम्मच सरसों  का तेल मिला कर पेस्ट सा बना कर रोज सुबह दांतों की मालिश करें दांतों की कोई समस्या नहीं होगी । 

6) प्याज भी दांतों की तकलीफ से निजात दिलाने मे सहायक है जिसके विषय मे मै पहले भी लिख चुकी हूँ ।

7) गरम पानी मे एक चुटकी नमक मिला कर रोज सुबह शाम कुल्ले करने से दांत की तकलीफ मे आराम मिलता है ।  

Tuesday, 12 March 2013

प्याज के लाभ


 प्याज के पौष्टिक तत्व :-
 प्याज विटामिन सी , विटामिन बी1 , विटामिन के , फोलिक एसिड , बायोटिन , क्रोमियम , कैल्शियम  तथा फाइबर का बहुत अच्छा स्रोत है । 
 100 ग्राम सरविंग मे 44 कैलोरीज़ , कार्बोहाइड्रेट , 1.4 ग्राम फाइबर होता है ।
 प्याज मे लहसुन की तरह ही एंजाइम एलिनेज पाये जाते है इसी कारण जब हम प्याज  काटते  है तो हमारी आँखों से पानी आता है ।
1. प्‍याज का रस कनपटियों और छाती पर मलने से लू नहीं लगती। खाने के साथ कच्‍चे प्‍याज का सेवन करना लाभदायक होता है।
2. कान में दर्द अथवा मवाद बहने की शिकायत होने पर प्‍याज के रस को हल्‍का गर्म कर के कान में डालने से आराम मिलता है।
3. आधा कप सफेद प्‍याज के रस में गुड़ और पिसी हल्‍दी मिला कर प्रात: वह शाम को पीने से पीलिया में लाभ होता है। छोटे प्‍याज को छील कर चौकोर काट कर सिरके या नींबू के रस में भिगो दें, ऊपर से नमक काली मिर्च डाल दें। पीलिया का यह शर्तियां इलाज है।
4. प्‍याज से हृदय धमनियों में रक्त के थक्‍के नहीं बनते और इस प्रकार हृदय संभवित क्षतियों से बचा रहता है। प्‍याज में लोहा पाया जाता है, जिससे शरीर मे एनीमिया नहीं होता। यह खून को गाढ़ा बनाता है और उसे पतला होने से रोकता है।
5. यदि किसी कुत्‍ते ने काट लिया हो, तो कटे हुए स्‍थान पर प्‍याज को पीसकर शहद के साथ मिलाकर लगाने से विष का प्रभाव जाता रहता है।
6. सरसों का तेल व प्‍याज का रस मिलाकर मालिश करने से गठिया के रोगी को लाभ पहुंचाता है। 7. प्‍याज के रस में शहद मिला कर चाटने से दमा और खांसी में आश्‍चर्यजनक सुधार आता है। इसके अलावा मिर्गी, हिस्टीरिया और पाण्डुरोग में भी प्याज लाभकारी है। मिर्गी में प्याज को सुंघा देने मात्र से ही कई बार रोगी को चंगा होता देखा गया है।
8. बच्चों को बदहजमी होने पर उन्हें प्याज के रस की तीन-चार बूँदें चटाने से लाभ होता है। अतिसार के पतले दस्तों के इलाज के लिए एक प्याज पीसकर रोगी की नाभि पर लेप करें या इसे किसी कपड़े पर फैलाकर नाभि पर बाँध दें।
9. हैजा हो गया हो तो सावधानी के तौर पर एक प्याला सोडा पानी में एक प्याला प्याज का रस, एक नीबू का रस, जरा सा नमक, जरा-सी काली मिर्च और थोड़ा सा अदरक का रस मिलाकर पी लें, इससे हाजमा दुरुस्त हो जाएगा तथा हैजे का आक्रमण नहीं होगा।
10. कब्ज के इलाज के लिए भोजन के साथ प्रतिदिन एक कच्चा प्याज जरूर खाएँ। यदि अजीर्ण की शिकायत हो तो प्याज के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर उसमें एक नीबू निचोड़ लें या सिरका डाल लें तथा भोजन के साथ इसका सेवन करें।
11. अगर दांत में पायरिया है, तो प्याज के टुकड़ों को तवे पर गर्म कीजिए और दांतों के नीचे दबाकर मुंह बंद कर लीजिए। इस प्रकार 10-12 मिनट में लार मुंह में इकट्ठी हो जाएगी। उसे मुंह में चारों ओर घुमाइए फिर निकाल फेंकिए। दिन में 4-5 बार 8-10 दिन करें, पायरिया जड़ से खत्म हो जाएगा, दांत के कीड़े भी मर जाएंगे और मसूड़ों को भी मजबूती प्राप्त होगी ।