Wednesday, 6 March 2013

प्राथमिक उपचार - 4

पिछले लेख मे मैंने आँख और नाक कान की कोई समस्या होने पर कैसे प्राथमिक उपचार करें यह बताया था ।

इस लेख मे - किसी व्यक्ति के द्वारा  जहरीला पदार्थ खा या पी लेने पर क्या प्राथमिक किकित्सा दी जा सकती है ये जानेंगे ।  

यदि किसी के साथ ऐसी घटना हो जाती है तो घर वालों के हांथ पाँव फूल जाते है और कोई रास्ता नहीं सूझता और रोगी के सारे तीमारदार हाय तोबा मचाना आरंभ कर देते हैं । जबकि ऐसी स्थिति मे तो तीमारदारों को बहुत ही शांति से काम लेना चाहिए और रोगी को संभालना चाहिए ।

सर्वप्रथम यह देखे  कि रोगी ने क्या खाया है और और वह होश मे रहे । उसे खुली हवा मे रखें उसका जहर निकालने का प्रयास करे इसके लिए उसके गले मे उंगली डाल कर उल्टी कराये। यदि ऐसा न कर पाएं तो  गुनगुना पानी नमक मिला कर पिलाएँ । 

यदि रोगी  पानी न पी पाये तो दो बड़े चम्मच सरसों का तेल या घी  पिला दिया जाना चाहिए ताकि वह स्वयम उल्टी कर पाने मे सक्षम हो पाये । 

यदी रोगी बेहोश हो गया हो तो बिना समय गँवाए डाक्टर के पास ले जाएँ । 


 किसी ऐसी जगह फंस जाने पर जहां जहरीली गैस का रिसाव हो गया हो या धुआँ इत्यादि का रिसाव हो रहा हो - ऐसी जगह पर सांस न लें और बाहर की ओर निकलने का प्रयास करें । 

यदि कोई व्यक्ति फंसा हो तो खुद पहले प्रोटेक्शन मास्क पहने उसके पश्चात उस व्यक्ति को बाहर निकालने मे मदद करें ।

यदि कोई जहरीला साँप या बिच्छू  काट ले तो  खुद बिना हडबड़ाए रोगी खुली हवा मे रखें उसके कपड़े ढीले कर दें जिस जगह साँप ने काटा हो उसके ऊपर और नीचे की ओर कस कर बांध दें ताकि सांप या बिच्छू  का जहर पूरे शरीर मे न फैले  , तेज धार के चाकू या ब्लेड को तेज आंच मे एकदम तपा लें और कटे हुए स्थान पर एक चिरा लगाएं और कस कर दबा दबा कर खून निकाल दें यदि फिर भी बाकी रह गया हो तो मुंह से चूस कर निकाल दें पर्ंतु ये ध्यान रहे कि खुद के मुंह मे कोई घाव न हो नही तो जहर चूसने वाले के  मुंह से उसके शरीर मे जा सकता है , और जहर निकल जाने पर घाव को गरम पानी मे एंटीसेप्टिक लोशन  डाल कर साफ कर दें और दवा लगाकर पट्टी कर दें । रोगी को सोने बिलकुल न दे   और गरम चाय या दूध पिलायें ।

यदि ज्यादा जहरीले साँप ने काटा हो या कटे हुये देर हो चुकी हो या साँप के काटने  की  जगह पर  छाले  से पड़ने लगे तो तुरंत बिना समय गँवाए डाक्टर के पास ले जाएँ ।


आगे और भी ............

Saturday, 2 March 2013

कुछ शब्द मित्रों से


मित्रों बहुत से पाठकों ने मुझसे यह प्रश्न किया  कि क्या आप डाक्टर है ?

मै यहाँ स्पष्ट करना चाहूंगी कि मै कोई डाक्टर नहीं हूँ । हाँ आयुर्वेद की पढ़ाई कर रही हूँ । और अपने अनुभव आपसे शेयर करती हूँ । प्राथमिक उपचार के विषय मे कैसे सीखा ये मै आप सब को पहले ही लिख चुकी हूँ । बाकी नुस्खे जो मैंने स्वयम अपनी दादी नानी से से सीखे व सुन रखे है जो कि अनुभूत भी है जिनसे किसी को कोई नुकसान नहीं होगा हाँ लाभ अवश्य होगा । बशर्ते कि मात्रा का ध्यान जरूर रखें ।

हमारे नाना जी स्व. श्री श्याम सुंदर पाण्डेय जी  आयुर्वेदाचार्य थे उनके हाथ की लिखी पुस्तको मे से केवल एक ही छप सकी दूसरी पुस्तक पूरी भी न हो पायी कि उनका देहांत हो गया था । मेरी माँ ने उनकी हस्त लिखित लिपि को संभाल रखा हुआ था । माता जी के देहांत के बाद मैंने ये निश्चय किया कि इस पुस्तक के जितने भी अंश बचे है मै अपने ब्लॉग मे लिखूँगी । और उनको ही आपसे  शेयर करती हूँ । आप पढे और स्वयम निर्णय लें आप हमारी बाते मानने के लिए बाध्य नही है । हाँ मै लिखने के लिए  स्वतंत्र  जरूर हूँ ।

प्राथमिक उपचार - 3

पिछले लेख मे आँख के विषय मे बताया था आज बात करेंगे नाक और  कान  की ।

कई बार हम सबने देखा है कि खेल ही खेल मे अक्सर बच्चे पेंसिल ,पेन , बेर या इमली के बीज या चाक का टुकड़ा , कोई कंकड़ , मोती इस तरह की कोई भी नुकसानदेह चीज नाक मे घुसा लेते है ऐसे मे माँ का क्या हाल होता है यह भुक्त भोगी माँ ही समझ  पाती है । बच्चा तो कष्ट झेलता ही है साथ मे घर के लोग भी बेहद परेशान हो जाते है जो कि स्वाभाविक है ।

ऐसे मे कभी भी स्वयम निकालने का प्रयास न करें । सिर्फ इतना करें कि जिस बच्चे की नाक मे इनमे से कुछ भी चला हो तो बच्चे की नाक मे दो बूंद सरसों का तेल टपका दे , सिर्फ दो बूंद ही इससे ज्यादा नहीं । इससे बच्चे को छींक आ जाएगी और जो चीज नाक मे होगी वह बाहर निकल आएगी ।

दूसरा यह करें कि बच्चे को नीचे झुका कर पीठ पर ज़ोर से थपथपा दें । यदि इन दोनों उपचार करने पर नाक की घुसी हुई चीज बाहर न निकले तो बिना समय गँवाए डाक्टर को दिखाएं ।

कान मे भी यदि कोई चीज घुस गई है तो भी सरसों का तेल दो बूंद टपका दे फिर ट्विजर की सहायता से निकाल लें यदि न कर सके तो बिना समय गँवाए डाक्टरी सहयता लें  यदि कोई  कीड़ा घुस जाए तो सरसों का तेल   गुनगुना कर दो बूंद टपका दे और डाक्टर को दिखाएँ इससे यह होगा कि  कीड़ा कान को नुकसान नहीं पहूँचा पाएगा । 

कान मे ठंड की वजह से दर्द होने पर एक टी स्पून मेथी को आधा  कप पानी मे उबाल ले जब पानी चौथाई रह जाए तब उतार लें और गुनगुना  ही कान मे ड्रापर  की सहायता से दो या तीन बूंद डाले । परंतु ये ध्यान रखें कि पानी अधिक गरम न हो इसके लिए आप इसे अपने हाथ पर डाल कर चेक कर ले ।

कान  की सफाई का विशेष ध्यान रखें । हर तीन चार दिनों के अंतर पर कान की सफाई करते रहे ।

 न सुनने की समस्या होने पर या कई तरह की आवाजें सुनाई देने पर तिल के तेल की दो दो बूंद डालें । और डाक्टर को दिखाएं ।

तेल  की थेरेपी के विषय मे फिर विस्तार से लिखूँगी ।



आगे और भी ............

Friday, 1 March 2013

प्राथमिक उपचार - 2

पिछले लेख मे मैंने चोटों और टूट फुट तथा बुखार इत्यादि के विषय मे प्राथमिक उपचार बताया था ।

आज आँख और नाक के विषय मे बात करते हैं ।

आंख शरीर का सबसे महत्त्व पूर्ण अंग है उसमे यदि छोटी सी किरकिरी भी चली जाए तो चैन नहीं मिलता । कोई धूल का कण , तिनका , कीड़ा कुछ भी यदि आँख मे चला  गया  हो तो आँख को मसलिए मत क्योंकि रगड़ने या मसलने से उसमे घाव हो सकता है ऐसे मे सिर्फ इतना करें ठंडे पानी से आँख बार बार धोये , आँख को कपड़े से ढ़क कर रखें और डाक्टर को दिखाये । आँख के विषय मे जरा भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए न ही स्वयं कोई उपचार करना चाहिए ।  आँख आने पर भी ठंडे पानी से आँख धोते रहना उचित रहता है ।

आँख स्वस्थ रहे इसके लिए एक नुस्खा :  एक छोटा सा फिटकरी का टुकड़ा ले और उसे एकदम साफ धुले हुए तवे पर रख दें तेज आंच मे इसका फुला बना ले जब फिटकरी बताशे जैसी फूल जाए उसे उतार कर साफ बट्टी से एकदम महीन पीस लें ध्यान रहे फिटकरी बिलकुल  मैदा जैसी महीन होनी चाहिए , तीन बड़े चम्मच गुलाब जल में मिला दें और साफ सफ़ेद कपड़ा ले उसकी चार पाँच परत बना ले और इससे तैयार की गई दवा छान लें साफ शीशी मे भर कर रख लें । और इस दवा को दिन मे दो बार दो दो बूंद आँख मे डालने से आँख की  रोशनी कम नहीं होती और कोई समस्या भी नहीं होती । ये अनुभूत प्रयोग है किन्तु जब आँख मे चोट लग गई हो या कुछ चला गया हो तब सर्व प्रथम आँख की सफाई का ख्याल रखें और डाक्टरी सलाह लें।



आगे और भी ...........





Pallavi saxena has left a new comment on your post "प्राथमिक उपचार - 2":
आँखों के लिए एक नुस्खा मैं भी देना चाहूंगी कि यदि फिटकरी न भी मिले तो केवल गुलाब जल भी आँखों में डाला जा सकता है इस से आँखों को शीतलता मिलती है और थकी हुई आँखों को आराम यह नुस्खा खासकर उन लोगों के लिए है जो आँखों से संबन्धित ज्यादा बारीक काम करते हैं जैसे सिलाई,बुनाई,कढ़ाई,या फिर कारीगरी और आजकल के आधुनिक दौर में computar या laptop का अत्यधिक स्तेमाल करते हैं जिसे आँखों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इसके अतिरिक्त अपने भोजन में विटामिन A का प्रयोग ज्यादा मात्रा में करें जैसे गाजर, पपीता,मछ्ली इत्यादि...बाज़ार में विटामिन A के कपसूल भी आसानी से उपलब्ध है लेकिन वह केवल डॉ की सलाह पर ही लें।

Thursday, 28 February 2013

कोई भी दुर्घटना होने पर कैसे करें प्राथमिक उपचार

बच्चे हों या बडे दुर्घटना किसी के साथ भी हो सकती है , जरूरी ये नहीं कि दुर्घटना कैसी है वरन ये जरूरी है कि व्यक्ति के उपचार से पहले उसका प्राथमिक उपचार बहुत जरूरी होता है । प्राथमिक उपचार के विषय मे हम सब को जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है ।

मैंने तो इसके विषय मे अपने विद्यालय मे कक्षा छ्ह से पढ़ और सीख रखा था , फिर स्काउट एण्ड गाइड की क्लास मे तथा एन सी सी और एन एस एस मे भी इसकी शिक्षा भलीभांति मिली । इसे मैं आप सबके साथ बाँट रही हूँ ।

जिन छोटी मोटी दुर्घटनाओं मे प्राथमिक चिकित्सा की जरूरत होती है , उनमे प्रमुख है -- चोट लग जाना , हड्डी टूट जाना , मोच आ जाना , जल जाना , बेहोशी आना , तेज बुखार , पानी मे डूबने से बचाना , साँप बिच्छू का काटना , पागल कुत्ते का काटना इत्यादि । समय पर प्राथमिक उपचार और डाक्टरी सहायता मिल जाने पर रोगी के ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है ।

घर के किसी व्यक्ति के दुर्घटना ग्रस्त हो जाने पर हाय तोबा मत मचाइए अन्यथा वह व्यक्ति और अधिक डर  जाएगा । ऐसी स्थिति मे धैर्य से काम लें उसका मनोबल कायम रखें । प्राथमिक उपचार दें और डाक्टर की सहायता उपलब्ध कराएं या अस्पताल ले जाएँ । 

कटने फटने से यदि घाव हो  गया हो और रक्त बह रहा हो तो सर्व प्रथम रक्त बंद करने का प्रयास करें , अपने  हाथ  साफ कर लें और घाव के मुंह को दबा कर बन्द कर दें इससे खून निकलना बंद हो जाएगा  और चोट वाले स्थान को ऊँचा उठाकर रखें   यदि घाव गहरा हो तो कोई भी दवा मत भर दें न ही किन्ही  भी पत्तियों का रस  लगा दें और न ही घाव को खुला छोड़े ,बल्कि गरम पानी एंटीसेप्टिक लोशन मिलाकर  साफ रुई से  घाव को  साफ कर दें।   एंटीसेप्टिक क्रीम लगाकर हल्की पट्टी बांध दें डाक्टर के पास ले जाए ।

हड्डी टूटने की आशंका होने पर :- यदि हाथ की हड्डी की समस्या है तो एक तिकोनी पट्टी लेकर गले मे बांध दे थैली नुमा हिस्सा आगे लटक जाएगा उसमे हाथ को संभाल कर बैठा दे फिर डाक्टर के पास ले जाएँ ।

यदि पैर की हड्डी टूटी है तो  सीधा पटरी नुमा लकड़ी का  टुकड़ा लेकर किसी पट्टी की सहायता से बांध दे रोगी को चलने फिरने न दें आराम से बैठा दे और डाक्टर को बुलाएँ या अस्पताल ले जाएं ।

सिर की चोट लगने पर तिकोनी पट्टी पानी मे भिगो कर स्कार्फ की तरह कस कर बांध दें और रोगी को अस्पताल ले जाए । 

जल जाने पर सबसे पहले जले हुए स्थान को ठंडे पानी  मे डुबो दें। 
और तब तक रखे रहिए जब तक जलन शांत न हो जाए । यदि जला हुआ घाव हल्का है तो गरम पानी थोड़ा ठंडा करले और  मीठा सोडा मिलाकर लगाएँ जलन और दर्द दोनों मे राहत मिलेगी ।

यदि कोई व्यक्ति लपटों मे घिर गया हो तो तुरंत कंबल डालें और प्रभावित व्यक्ति को जमीन पर रोल करवा दे आग तुरंत बुझ जाएगी । साफ चादर मे प्रभावित व्यक्ति को लपेट कर तुरंत अस्पताल ले जाएँ ।

कभी कभी घर के किसी सदस्य को तेज बुखार चढ़ जाता है ऐसे मे रोगी को केवल हल्के कपड़े ही पहने रहने दें बाकी कपड़े हटा दे और ठंडे पानी मे तौलिया भिगो कर सारा बदन पोछते रहे । बुखार ठंडे पानी की पट्टी से कम होता है । ठंडी पट्टी बराबर रखते रहे और डाक्टरी सलाह लें ।


 आगे और भी ..........


Wednesday, 27 February 2013

बादाम के गुणों को भी जानिए



स्वाद की दृष्टि से बादाम दो प्रकार के होते है । मीठे और कडवे । मीठे बादामों मे भी छिलके मोटाई के अनुरूप दो तरह के बादाम होते है । पतले छिलके वाला कागजी और मोटे छिलके वाला साधारण । भारत मे इसकी खेती अधिकतर कश्मीर और हिमाचल मे होती है ।
बादाम के गुण :-
बादाम मे पाये जाने वाले लोहा , तांबा , फास्फोरस और विटामिन बी का  दवा के रूप मे उपयोग के कारण बादाम के औषधीय गुणो का महत्तव है । ये सभी तत्व एक साथ क्रिया करते है और दिमाग , स्नायु , हड्डीयां , हृदय , जिगर के ठीक से काम करते रहने मे मदद करते हैं ।
 कुछ प्रकृतिक चिकित्सकों के अनुसार दिमाग की कार्यशक्ति को सुचारु रूप से चलाये रखने मे बादाम बहुत उपयोगी है ।
बादामों को कुछ घंटे के लिए पानी मे भिगो दें फिर इन्हे छील कर सफ़ेद गिरी को चंदन की तरह घिस कर दूध या शहद के साथ लेने से दिमाग तेज होता है , नर्व्स मजबूत होती है । बादाम खाने का सबसे सही तरीका यही है ।
जो शारीरिक रूप से कमजोर दिखते है है वे यदि नियमित चार पाँच बादाम को घिस कर नियमित दूध के साथ लेते है वे अवश्य लाभ पाते है । अनुभूत नुस्खा है ,प्रयोग अवश्य करें ।  
बादाम से थायमींन  नामक विटामिन मिलता है । इसलिए इसे नर्व टॉनिक भी कहते है । और दिमाग के थक जाने पर या चक्कर आने पर बादाम खाने से फायदा मिलता है ।
बादाम मे कॉपर पाया जाता है इसलिए ये छिलका सहित खाने पर खून मे लाल कणों की कमी को दूर करता है ।
जिनको कब्ज रहता हो उन्हे रात को सोते समय बादाम की दस बारह गिरियाँ चबा कर खाने और ऊपर से गुनगुना दूध पीने से लाभ मिलता है ।




Saturday, 23 February 2013

 पौष्टिक व बल-बुद्धिवर्धक तिल :-
तिल बलप्रदायक, बुद्धि व वीर्यवर्धक, जठराग्नि–प्रदीपक, वातशामक व कफ-पित्त प्रकोपक है | काले, सफेद और लाल तिलों में काले तिल श्रेष्ठ है | १०० ग्राम तिलों में १४५० मि.ग्रा. इतनी प्रचंड मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है | जिससे ये अस्थि, संधि (जोड़ों), केश व दाँतों को मजबूत बनाते है |

आयुर्वेद के अनुसार सभी तेलों में तिल का तेल श्रेष्ठ है, यह उत्तम वायुशामक है | अपनी स्निग्धता, तरलता और उष्णता के कारण शरीर के सूक्ष्म स्रोतों में प्रवेश कर दोषों को जड से उखाड़ने तथा शरीर के सभी अव्यवों को दृढ़ व मुलायम रखने का कार्य करता है | टूटी हुई हड्डियों व स्नायुओं को जोड़ने में मदद करता है | कृश शरीर में मेद बढाता है व स्थूल शरीर से मेद घटाता है | तिल के तेल की मालिश करके सुर्यस्नान करने से त्वचा मुलायम व चमकदार होती है, त्वचा में ढीलापन, झुरियाँ नहीं आती |

तिल के औषोधीय प्रयोग :-

रसायन–प्रयोग : अष्टांग संग्रहकर श्री वाग्भट्टाचार्यजी के अनुसार १५ से २५ ग्राम काले तिल सुबह चबा-चबाकर खाने व ऊपर से शीतल जल पीने से सम्पूर्ण शरीर–विशेषत: हड्डियाँ, दांत, संधियाँ व बाल मजबूत बनते है |

बलवर्धक प्रयोग : सफेद तिल भिगोकर, पीसकर, छानके उसका दूध बना ले | ५० से १०० ग्राम इस दूध में २५ से ५० ग्राम पुराना गुड मिलाकर नियमित लेने व १२ सूर्यनमस्कार करने से शरीर बलवान होता है |

तिल सेंककर गुड व घी मिला के लड्डू बना लें | एक लड्डू सुबह चबाकर खाने से मस्तिष्क व शरीर की दुर्बलता दूर होती है |

एक-एक चम्मच तिल व घी गर्म पानी के साथ रोज दो या तीन बार खाने से पुराने आँव, कब्ज व बवासीर में रहत मिलती है |

तिल – सेवन की मात्रा : १० से २५ ग्राम

विशेष जानकारी : तिल की ऊपरी सतह पर पाया जानेवाला ‘आँक्जेलिक एसिड’ कैल्सियम के अवशोषण में बाधा उत्पन्न करता है | इसलिए तिलों को पानी में भिगोकर, हाथों से मसल कर ऊपरी छिलके उतार के उपयोग करना आधिक लाभदायी है |

 उष्ण प्रकृति के व्यक्ति, गर्भिणी स्त्रियाँ तिल का सेवन अल्प मात्रा में करें | अधिक मासिक–स्राव व पित्त-विकारों में तिल नहीं खाये |

· तिल, तिल के पदार्थ तथा तेल का उपयोग रात को नहीं करना चाहिये |

· तिल के तेल का अधिक सेवन नेत्रों के लिए हानिकारक है |