Wednesday, 20 February 2013

हल्दी को भी जानिए



हल्दी में उड़नशील तेल ५.८% प्रोटीन ६.३ % द्रव्य ५.१ % खनिज द्रव्य ३.५.% करबोहाईड्रेट ६८.४ के अतिरिक्त कुर्कुमिन नामक पीत रंजक द्रव्य, विटमिन A पाए जाते है।
 हल्दी पाचन तन्त्र की समस्याओं, गठिया, रक्त-प्रवाह की समस्याओं, कैंसर, जीवाणुओं (बेक्टीरिया) के संक्रमण, उच्च रक्तचाप और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल की समस्या और शरीर की कोशिकाओं की टूट-फूट की मरम्मत में लाभकारी है।
हल्दी कफ़-वात शामक, पित्त रेचक व पित्त शामक है. रक्त स्तम्भन , मूत्र रोग, गर्भश्य, प्रमेह, त्वचा रोग , वात-पित्त-कफ़ में इसका प्रयोग बहुत लाभकारी है।
 यकृत की वृद्धि में इसका लेप किया जाता है. नाडी शूल के अतिरिक्त पाचन क्रिया के रोगों ... अरुचि ( भूख न लगना) विबंध , कमला, जलोधर व कृमि में भी यह लाभकारी  पाई गई है।
 इसी प्रकार हल्दी की एक किस्म काली  हल्दी के रुप मे भी होती है! उपचार मे काली  हल्दी  पीली हल्दी के मुकाबले अधिक लाभकारी होती है ।

 एक चम्मच शहद के साथ एक चुटकी  हल्दी मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय  लेने से खांसी उड़नछू हो जाती है ।

मोच आ जाने पर काली हल्दी पीस कर लेप लगा लें और ऊपर एरंड का पत्ता रख कर पट्टी बांध दे , एक दिन मे ही मोच से छुटकारा मिल जाएगा ।

रात को सोने से पूर्व एक गिलास गुनगुने दूध मे आधा  टी  स्पून हल्दी मिलाकर   पीने से अंदरूनी चोटें ठीक होने मे लाभ होता है और नई गठिया के रोग मे भी आराम मिलता है ।

दो गिलास पानी मे आधी टी स्पून हल्दी एक चुटकी अजवाइन थोड़ी सी अदरक कूट कर डाल दें और उबाल कर आधा कर रह जाने पर  गरम ही चाय की तरह पिये , शरीर की सूजन और वात रोगो से छुटकारा मिल जाएगा ।


हल्दी उन लोगों के लिए सही नहीं रहती है जिन लोगो को अल्सर हो , पित्त प्रधान हो , जिन  लोगो को गालस्टोन हो , उनकी समस्या बढ्ने का खतरा रहता है ।


गर्भवती महिलाओं को दाल , सब्जी मे जितनी हल्दी ली जाती है बस उतनी ही ठीक है , अधिक लेने के लिए उन्हे अपने डाक्टर से
सलाह ले लेनी चाहिये ।


जो लीवर और हार्ट की समस्याओं से पीड़ित है वे भी डाक्टर की सलाह ले ।
 

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