Friday, 8 March 2013

कुछ अनुभूत नुस्खे :-

1) जो पतले और कमजोर से दिखते है पर आनुवांशिक नहीं है और थोड़ा मोटा होंना चाहते है उनके लिए - पाँच बादाम , थोड़ा सा खसखस , दो छुहारे , चार मुनक्के रात भर पानी मे भिगो कर रखें सुबह बादाम के छिलके उतार ले , छुहारे के बीज निकाल लें , मुनक्के के भी बीज निकाल दे एकसाथ मिक्सी मे एकदम महीन पीस लें । इस पेस्ट को एक गिलास दूध मे उबालें आधा शेष रहने पर उतार लें । गरम गरम ही चाय की तरह पिये । ये उपयोग नियमित करते रहे जब तक लाभ न परिलक्षित होने लगे । लाभ होने पर आप इसमे मात्रा अपने हिसाब से कम भी कर सकते है । जो आनुवांशिक रूप से दुबले पतले हैं वे भी प्रयोग करे । बल , बुद्धि एवं वीर्यवर्धक  अचूक नुस्खा है । 

2) 250 ग्राम मेथी पीस कर  250 देशी घी मे भीगा कर रख दें  दो दिन तक भीगने के बाद इसको पका ले मेथी पकने पर लाल हो जाएगी ,उतार कर ठंडा हो जाने दें अब इसमे एक किलो चीनी पीस कर इसमे मिला दें इसके छोटे छोटे गोले बना ले रोज सुबह  गरम दूध के साथ एक लड्डू खाएं अवश्य लाभ होगा । 

3) दो पके केले एक गिलास दूध एक चम्मच चीनी एक टी स्पून पीसी इलायची पावडर मिला कर मिक्सर मे डाले और शेक बना लें । सुबह  रोज एक माह तक ही पीने से लाभ नजर आने लगेगा ।

4) दस बादाम दस काजू एक कप दूध मे भिगो कर रख दें एक घंटे बाद पीस कर उबाल ले और नित्य सुबह पिएं पर खाली पेट न पिये कुछ खाकर पिये वरना किसी किसी मे दस्त लगने की भी शिकायत हो जाती है ।

प्राथमिक उपचार - 6

आज हम बात करेंगे फस्ट एड बाक्स की ;

हर घर मे फस्ट एड बाक्स होना चाहिए और हर व्यक्ति हो प्राथमिक चिकित्सा का ज्ञान होना जरूरी है । ताकि मुश्किल स्थिति मे हांथ पाँव न फूले और डाक्टरी सहयता मिलने तक रोगी को उपचार दिया जा सके । कई बार ऐसा होता ही कि हमारी अज्ञानता की वजह से हम छोटी छोटी समस्या का समाधान नहीं कर पाते है। \

तो आइए बनाये फस्ट एड बाक्स :-एक प्लास्टिक का बड़ा बाक्स , रुई का बंडल , कुछ छोटी बड़ी पट्टियाँ , तिकोनी पट्टियाँ ,एक छोटी कैंची ,  डेटोल की शीशी , टिंचरआयोडिन , लाल दवा ,दर्द निवारक ज़ेल , सोफ्रामायसिन, बारनोल ,  कुछ दर्द निवारक दवाएं , बुखार निवारक दवाएं, दस्त निवारक दवाएं , कफ सिरप , कुछ विटामिन की दवाएं , डाइजेस्टिव सिरप या दवाएं , ग्लोकोज़ , ओ आर एस के पैकेट , बैंड एड , इत्यादि उस डिब्बे मे रखें , और डिब्बा ऐसे स्थान पर रखें जहां आवश्यकता पड़ने पर तुरंत उठा कर चिकित्सा दी जा सके ।

नोट :- दवाये डाक्टर से सलाह ले कर ही रखें । यदि प्राथमिक उपचार की विधियाँ नहीं जानते है तो इस विषय पर डाक्टर  से परामर्श करें वे स्वयं आपको सिखा देंगे ।  

Thursday, 7 March 2013

प्राथमिक उपचार - 5

कुछ अन्य उपचार

कुत्ते के काटने पर :- कटे हुए स्थान को साबुन पानी से धोकर साफ कर दें थोड़ा एंटीसेप्टिक लोशन लगा दें और डाक्टर के पास ले जाएँ ।

बिजली का करेंट लगने पर :- खुद सूखी चप्पल पहने और बिजली का मेन स्विच आफ कर दें। यदि मेन स्विच से दूर हैं तो उसी स्विच को ऑफ करें । और लकड़ी की सहयता से व्यक्ति को दूर करें । दूर होते ही उसके हाथ पाँव रगड़े । कपड़े  ढीले कर दें खुली हवा मे रखें , भीड़ इकट्ठी न होने दें । यदि रोगी बेहोश हो गया हो तो बिना समय गवाए डाक्टर के पास ले जाएँ ।

पानी मे डूब जाने पर :-  
        सर्वप्रथम ये सुनिश्चित करें कि पानी मे दुबे हुये व्यक्ति को कितना समय हुआ है यदि  दो तीन  घंटे से ऊपर हो गया है तो रोगी बचने संभावना कम हो जाती है । रोगी को पानी से निकालते ही उसे उल्टा लिटा दें और पूरे दबाव के साथ पीठ को जोर से दबाते रहे जब तक पूरा पानी न निकल जाए तब तक यही प्रक्रिया दोहराते रहें । यदि रोगी तब भी प्रतिउत्तर न दे तब उसके हार्ट को थोड़ा ज़ोर से दबाये । तब भी रोगी प्रतिउत्तर न दे तब मुंह से सांस दे और कोई रिएक्शन न होने पर तुरंत डाक्टर के पास ले जाए ।

कोई नस काट लेने पर :-   रोगी के कटे हुए स्थान को कस कर दबाये या तुरंत गीली पट्टी कस कर बांध दें । यदि ज्यादा खून बह चुका हो तो डाक्टर के पास ले जाने मे देरी न करें ।


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Wednesday, 6 March 2013

प्राथमिक उपचार - 4

पिछले लेख मे मैंने आँख और नाक कान की कोई समस्या होने पर कैसे प्राथमिक उपचार करें यह बताया था ।

इस लेख मे - किसी व्यक्ति के द्वारा  जहरीला पदार्थ खा या पी लेने पर क्या प्राथमिक किकित्सा दी जा सकती है ये जानेंगे ।  

यदि किसी के साथ ऐसी घटना हो जाती है तो घर वालों के हांथ पाँव फूल जाते है और कोई रास्ता नहीं सूझता और रोगी के सारे तीमारदार हाय तोबा मचाना आरंभ कर देते हैं । जबकि ऐसी स्थिति मे तो तीमारदारों को बहुत ही शांति से काम लेना चाहिए और रोगी को संभालना चाहिए ।

सर्वप्रथम यह देखे  कि रोगी ने क्या खाया है और और वह होश मे रहे । उसे खुली हवा मे रखें उसका जहर निकालने का प्रयास करे इसके लिए उसके गले मे उंगली डाल कर उल्टी कराये। यदि ऐसा न कर पाएं तो  गुनगुना पानी नमक मिला कर पिलाएँ । 

यदि रोगी  पानी न पी पाये तो दो बड़े चम्मच सरसों का तेल या घी  पिला दिया जाना चाहिए ताकि वह स्वयम उल्टी कर पाने मे सक्षम हो पाये । 

यदी रोगी बेहोश हो गया हो तो बिना समय गँवाए डाक्टर के पास ले जाएँ । 


 किसी ऐसी जगह फंस जाने पर जहां जहरीली गैस का रिसाव हो गया हो या धुआँ इत्यादि का रिसाव हो रहा हो - ऐसी जगह पर सांस न लें और बाहर की ओर निकलने का प्रयास करें । 

यदि कोई व्यक्ति फंसा हो तो खुद पहले प्रोटेक्शन मास्क पहने उसके पश्चात उस व्यक्ति को बाहर निकालने मे मदद करें ।

यदि कोई जहरीला साँप या बिच्छू  काट ले तो  खुद बिना हडबड़ाए रोगी खुली हवा मे रखें उसके कपड़े ढीले कर दें जिस जगह साँप ने काटा हो उसके ऊपर और नीचे की ओर कस कर बांध दें ताकि सांप या बिच्छू  का जहर पूरे शरीर मे न फैले  , तेज धार के चाकू या ब्लेड को तेज आंच मे एकदम तपा लें और कटे हुए स्थान पर एक चिरा लगाएं और कस कर दबा दबा कर खून निकाल दें यदि फिर भी बाकी रह गया हो तो मुंह से चूस कर निकाल दें पर्ंतु ये ध्यान रहे कि खुद के मुंह मे कोई घाव न हो नही तो जहर चूसने वाले के  मुंह से उसके शरीर मे जा सकता है , और जहर निकल जाने पर घाव को गरम पानी मे एंटीसेप्टिक लोशन  डाल कर साफ कर दें और दवा लगाकर पट्टी कर दें । रोगी को सोने बिलकुल न दे   और गरम चाय या दूध पिलायें ।

यदि ज्यादा जहरीले साँप ने काटा हो या कटे हुये देर हो चुकी हो या साँप के काटने  की  जगह पर  छाले  से पड़ने लगे तो तुरंत बिना समय गँवाए डाक्टर के पास ले जाएँ ।


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Saturday, 2 March 2013

कुछ शब्द मित्रों से


मित्रों बहुत से पाठकों ने मुझसे यह प्रश्न किया  कि क्या आप डाक्टर है ?

मै यहाँ स्पष्ट करना चाहूंगी कि मै कोई डाक्टर नहीं हूँ । हाँ आयुर्वेद की पढ़ाई कर रही हूँ । और अपने अनुभव आपसे शेयर करती हूँ । प्राथमिक उपचार के विषय मे कैसे सीखा ये मै आप सब को पहले ही लिख चुकी हूँ । बाकी नुस्खे जो मैंने स्वयम अपनी दादी नानी से से सीखे व सुन रखे है जो कि अनुभूत भी है जिनसे किसी को कोई नुकसान नहीं होगा हाँ लाभ अवश्य होगा । बशर्ते कि मात्रा का ध्यान जरूर रखें ।

हमारे नाना जी स्व. श्री श्याम सुंदर पाण्डेय जी  आयुर्वेदाचार्य थे उनके हाथ की लिखी पुस्तको मे से केवल एक ही छप सकी दूसरी पुस्तक पूरी भी न हो पायी कि उनका देहांत हो गया था । मेरी माँ ने उनकी हस्त लिखित लिपि को संभाल रखा हुआ था । माता जी के देहांत के बाद मैंने ये निश्चय किया कि इस पुस्तक के जितने भी अंश बचे है मै अपने ब्लॉग मे लिखूँगी । और उनको ही आपसे  शेयर करती हूँ । आप पढे और स्वयम निर्णय लें आप हमारी बाते मानने के लिए बाध्य नही है । हाँ मै लिखने के लिए  स्वतंत्र  जरूर हूँ ।

प्राथमिक उपचार - 3

पिछले लेख मे आँख के विषय मे बताया था आज बात करेंगे नाक और  कान  की ।

कई बार हम सबने देखा है कि खेल ही खेल मे अक्सर बच्चे पेंसिल ,पेन , बेर या इमली के बीज या चाक का टुकड़ा , कोई कंकड़ , मोती इस तरह की कोई भी नुकसानदेह चीज नाक मे घुसा लेते है ऐसे मे माँ का क्या हाल होता है यह भुक्त भोगी माँ ही समझ  पाती है । बच्चा तो कष्ट झेलता ही है साथ मे घर के लोग भी बेहद परेशान हो जाते है जो कि स्वाभाविक है ।

ऐसे मे कभी भी स्वयम निकालने का प्रयास न करें । सिर्फ इतना करें कि जिस बच्चे की नाक मे इनमे से कुछ भी चला हो तो बच्चे की नाक मे दो बूंद सरसों का तेल टपका दे , सिर्फ दो बूंद ही इससे ज्यादा नहीं । इससे बच्चे को छींक आ जाएगी और जो चीज नाक मे होगी वह बाहर निकल आएगी ।

दूसरा यह करें कि बच्चे को नीचे झुका कर पीठ पर ज़ोर से थपथपा दें । यदि इन दोनों उपचार करने पर नाक की घुसी हुई चीज बाहर न निकले तो बिना समय गँवाए डाक्टर को दिखाएं ।

कान मे भी यदि कोई चीज घुस गई है तो भी सरसों का तेल दो बूंद टपका दे फिर ट्विजर की सहायता से निकाल लें यदि न कर सके तो बिना समय गँवाए डाक्टरी सहयता लें  यदि कोई  कीड़ा घुस जाए तो सरसों का तेल   गुनगुना कर दो बूंद टपका दे और डाक्टर को दिखाएँ इससे यह होगा कि  कीड़ा कान को नुकसान नहीं पहूँचा पाएगा । 

कान मे ठंड की वजह से दर्द होने पर एक टी स्पून मेथी को आधा  कप पानी मे उबाल ले जब पानी चौथाई रह जाए तब उतार लें और गुनगुना  ही कान मे ड्रापर  की सहायता से दो या तीन बूंद डाले । परंतु ये ध्यान रखें कि पानी अधिक गरम न हो इसके लिए आप इसे अपने हाथ पर डाल कर चेक कर ले ।

कान  की सफाई का विशेष ध्यान रखें । हर तीन चार दिनों के अंतर पर कान की सफाई करते रहे ।

 न सुनने की समस्या होने पर या कई तरह की आवाजें सुनाई देने पर तिल के तेल की दो दो बूंद डालें । और डाक्टर को दिखाएं ।

तेल  की थेरेपी के विषय मे फिर विस्तार से लिखूँगी ।



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Friday, 1 March 2013

प्राथमिक उपचार - 2

पिछले लेख मे मैंने चोटों और टूट फुट तथा बुखार इत्यादि के विषय मे प्राथमिक उपचार बताया था ।

आज आँख और नाक के विषय मे बात करते हैं ।

आंख शरीर का सबसे महत्त्व पूर्ण अंग है उसमे यदि छोटी सी किरकिरी भी चली जाए तो चैन नहीं मिलता । कोई धूल का कण , तिनका , कीड़ा कुछ भी यदि आँख मे चला  गया  हो तो आँख को मसलिए मत क्योंकि रगड़ने या मसलने से उसमे घाव हो सकता है ऐसे मे सिर्फ इतना करें ठंडे पानी से आँख बार बार धोये , आँख को कपड़े से ढ़क कर रखें और डाक्टर को दिखाये । आँख के विषय मे जरा भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए न ही स्वयं कोई उपचार करना चाहिए ।  आँख आने पर भी ठंडे पानी से आँख धोते रहना उचित रहता है ।

आँख स्वस्थ रहे इसके लिए एक नुस्खा :  एक छोटा सा फिटकरी का टुकड़ा ले और उसे एकदम साफ धुले हुए तवे पर रख दें तेज आंच मे इसका फुला बना ले जब फिटकरी बताशे जैसी फूल जाए उसे उतार कर साफ बट्टी से एकदम महीन पीस लें ध्यान रहे फिटकरी बिलकुल  मैदा जैसी महीन होनी चाहिए , तीन बड़े चम्मच गुलाब जल में मिला दें और साफ सफ़ेद कपड़ा ले उसकी चार पाँच परत बना ले और इससे तैयार की गई दवा छान लें साफ शीशी मे भर कर रख लें । और इस दवा को दिन मे दो बार दो दो बूंद आँख मे डालने से आँख की  रोशनी कम नहीं होती और कोई समस्या भी नहीं होती । ये अनुभूत प्रयोग है किन्तु जब आँख मे चोट लग गई हो या कुछ चला गया हो तब सर्व प्रथम आँख की सफाई का ख्याल रखें और डाक्टरी सलाह लें।



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Pallavi saxena has left a new comment on your post "प्राथमिक उपचार - 2":
आँखों के लिए एक नुस्खा मैं भी देना चाहूंगी कि यदि फिटकरी न भी मिले तो केवल गुलाब जल भी आँखों में डाला जा सकता है इस से आँखों को शीतलता मिलती है और थकी हुई आँखों को आराम यह नुस्खा खासकर उन लोगों के लिए है जो आँखों से संबन्धित ज्यादा बारीक काम करते हैं जैसे सिलाई,बुनाई,कढ़ाई,या फिर कारीगरी और आजकल के आधुनिक दौर में computar या laptop का अत्यधिक स्तेमाल करते हैं जिसे आँखों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इसके अतिरिक्त अपने भोजन में विटामिन A का प्रयोग ज्यादा मात्रा में करें जैसे गाजर, पपीता,मछ्ली इत्यादि...बाज़ार में विटामिन A के कपसूल भी आसानी से उपलब्ध है लेकिन वह केवल डॉ की सलाह पर ही लें।